http://www.youtube.com/watch?v=9cHoKpM_WcA विस्तार है अपार, प्रजा द…

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http://www.youtube.com/watch?v=9cHoKpM_WcA विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ

गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . .. . . . नैतिकता नष्ट हुई, मानवता

भ्रष्ट हुई, निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूँ. . . . इतिहास की पुकार, करे

हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही

हो क्यूँ. . . . विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द

सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . .. Updated 6 Sep 2010, 15:39